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Home Pilates Workout: आजकल लोग इतने व्यस्त हो गए हैं कि उनके पास जिम जाने का समय ही नहीं बचता. कभी ऑफिस की डेडलाइंस, कभी घर की जिम्मेदारियां और दिनभर का हंगामा जिम तक पहुंचना मुश्किल बना देता है. अगर आप भी ऐसी ही लाइफस्टाइल जी रहे हैं तो यह खबर आपके लिए है.
फिट रहने के लिए न तो महंगी जिम मेंबरशिप चाहिए और न भारी-भरकम मशीनें. दीपिका पादुकोण, आलिया भट्ट और कैटरीना कैफ जैसी सेलेब्स की ट्रेनर यास्मीन कराचीवाला ने हाल ही में 5 पिलाटे वर्कआउट शेयर किए हैं, जिन्हें आप घर पर सिर्फ 10 मिनट में कर सकते हैं और शरीर को फ्लेक्सिबल बना सकते हैं.
1. रोल डाउन टू प्लैंक
सीधे खड़े होकर धीरे-धीरे झुकें, हाथों को जमीन तक लाएं और आगे बढ़ाकर प्लैंक पोज में आएं. कुछ सेकंड रुकें और फिर धीरे-धीरे वापस खड़े हो जाएं.
फायदा: पेट, पीठ और कंधे मजबूत होते हैं और बैलेंस बेहतर होता है.
2. लेग पुल फ्रंट
प्लैंक पोज में आएं और एक-एक करके पैर को ऊपर उठाएं. कूल्हे और कमर स्थिर रखें.
फायदा: पेट, हिप्स और पैरों की मसल्स टोन होती हैं, बैलेंस सुधरता है.
3. सीटिंग स्पाइन ट्विस्ट
पैर फैलाकर सीधे बैठें, पंजे ऊपर की ओर रखें. दोनों हाथ कंधे की ऊंचाई पर फैलाएं और कमर से शरीर को एक तरफ घुमाएं, सांस छोड़ें. फिर दूसरी तरफ यही करें.
फायदा: रीढ़ की हड्डी लचीली होती है और साइड पेट की मसल्स मजबूत होती हैं.
4. स्विमिंग की हंड्रेड्स
पीठ के बल लेटें, पैर और कंधे मैट से ऊपर उठाएं. दोनों हाथ तेजी से ऊपर-नीचे करें. पांच बार सांस अंदर और पांच बार बाहर छोड़ें. 100 बीट्स तक करें.
फायदा: पेट की मसल्स एक्टिव होती हैं, ब्लड फ्लो और सांस बेहतर होती है.
5. गेंद की तरह लुढ़कना
घुटनों को छाती से लगाकर बैठें, पीठ को C-शेप में करें. सांस लें और पीछे की ओर कंधों तक लुढ़कें. सांस छोड़ते हुए बिना पैर या सिर जमीन पर टिकाए आगे आएं.
फायदा: रीढ़ की फ्लेक्सिबिलिटी बढ़ती है, कोर मजबूत होता है और कोऑर्डिनेशन बेहतर होता है.
इन पांच पिलाटे एक्सरसाइज को रोज 10 मिनट करने से आप बिना जिम जाए भी फिट और फ्लेक्सिबल बॉडी पा सकते हैं.
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Kidney Health: हमारे शरीर से निकलने वाला यूरिन आमतौर पर हल्के पीले से लेकर गहरे पीले या अंबर रंग का होता है. लेकिन कई बार लोग देखते हैं कि यूरिन झागदार दिख रहा है. ज़्यादातर मामलों में ऐसा तब होता है जब ब्लैडर (मूत्राशय) बहुत भरा होता है और पेशाब तेज़ी से निकलने पर पानी में हलचल पैदा होती है. हालांकि, अगर झाग बार-बार और लगातार बने रहते हैं तो ये किडनी से जुड़ी समस्या का संकेत भी हो सकता है.
क्यों बनता है यूरिन में झाग?
महाराष्ट्र के ठाणे स्थित KIMS अस्पताल के यूरोलॉजिस्ट डॉ. अजीत गुजेला के मुताबिक, झागदार पेशाब हमेशा खराब किडनी का लक्षण नहीं होता. यह कभी-कभी तेज़ पेशाब, शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) या टॉयलेट में बचे साबुन के अवशेषों की वजह से भी हो सकता है. लेकिन अगर यूरिन में लगातार झाग बन रहे हैं और जल्दी गायब नहीं हो रहे, तो यह प्रोटीन्यूरिया का संकेत हो सकता है. इसका मतलब है कि यूरिन में प्रोटीन की मात्रा बढ़ रही है, जो दर्शाता है कि किडनी ठीक से फ़िल्टरिंग नहीं कर रही है.
किडनी डैमेज के शुरुआती संकेत
अगर यूरिन बार-बार झागदार आ रहा है और लंबे समय तक झाग बना रहता है, तो यह किडनी डैमेज या किडनी डिजीज़ का शुरुआती लक्षण हो सकता है. ऐसा इसलिए क्योंकि स्वस्थ किडनी खून से प्रोटीन को फ़िल्टर नहीं होने देती, लेकिन जब किडनी के फ़िल्टर (ग्लोमेरुलस) खराब होने लगते हैं तो प्रोटीन मूत्र में आने लगता है.
इन लक्षणों पर भी रखें ध्यान
अगर झागदार यूरिन के साथ नीचे दिए लक्षण नज़र आएं, तो डॉक्टर से ज़रूर मिलें.
हाथ, पैर, चेहरा या पेट में सूजन (फ्लूइड जमा होना)
लगातार थकान रहना
भूख न लगना
मतली या उल्टी
नींद की समस्या
यूरिन की मात्रा में बदलाव
पेशाब का बहुत हल्का या बहुत गहरा रंग
क्या करें?
अगर झागदार पेशाब कभी-कभी आता है तो ज़्यादा चिंता की बात नहीं, लेकिन अगर यह लगातार दिख रहा है या साथ में अन्य लक्षण भी हैं, तो नेफ्रोलॉजिस्ट (किडनी विशेषज्ञ) से तुरंत जांच कराएं. समय रहते ध्यान देने पर किडनी रोग को शुरुआती स्टेज में ही कंट्रोल किया जा सकता है.
नोट: यह जानकारी जागरूकता के उद्देश्य से है. किसी भी लक्षण पर डॉक्टर से सलाह लेना ज़रूरी है.
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Winter Throat Pain Remedies: सर्दियों का मौसम जहां ठंड और सुहावना एहसास देता है, वहीं इस मौसम में गले से जुड़ी समस्याएं भी तेजी से बढ़ जाती हैं. बार-बार तापमान बदलना और ठंडी, सूखी हवा गले की नमी छीन लेती है. आयुर्वेद के मुताबिक, इस मौसम में शरीर का वात और कफ असंतुलन में आ जाता है, जिससे गला सूखना, आवाज बैठना, खराश और दर्द जैसी परेशानियां बढ़ जाती हैं.
विज्ञान भी मानता है कि ठंडी हवा गले की म्यूकस लाइनिंग को कमजोर कर देती है, जिससे वायरस और बैक्टीरिया आसानी से संक्रमण फैला देते हैं. लेकिन राहत की बात यह है कि इन समस्याओं से बचाव के लिए महंगी दवाओं की जरूरत नहीं होती. हमारी रसोई में मौजूद कुछ घरेलू चीजें ही गले की परेशानी को जड़ से खत्म करने में मदद कर सकती हैं.
काली मिर्च और मिश्री का कमाल
काली मिर्च को आयुर्वेद में बलगम कम करने वाली औषधि माना गया है. इसमें मौजूद पाइपरीन तत्व गले में जमा कफ को कम करता है और आवाज को साफ करता है. जब काली मिर्च को मिश्री के साथ चबाया जाता है तो यह गले की सूजन, भारीपन और जलन को काफी हद तक कम कर देता है. वैज्ञानिक भी मानते हैं कि काली मिर्च का एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण गले की सूजन को कम करता है.
अदरक
अदरक का रस सर्दियों में गले के लिए बेहद फायदेमंद माना जाता है. अदरक में मौजूद जिंजरॉल तत्व सूजन को कम करता है और दर्द से राहत देता है. नींबू और सेंधा नमक के साथ इसका सेवन करने से गले की सफाई होती है और इंफेक्शन तेजी से ठीक होता है.
मुलेठी
मुलेठी को गले के लिए एक प्राकृतिक टॉनिक माना जाता है. यह गले पर एक सुरक्षात्मक परत बनाती है, जिससे जलन और दर्द कम होता है. आंवला शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है और इंफेक्शन से लड़ने में मदद करता है. मिश्री इस मिश्रण को संतुलित करके गले को ठंडक और राहत देती है.
नोट:- डॉक्टरों का मानना है कि अगर इन घरेलू उपायों को सही तरीके से अपनाया जाए तो सर्दियों में गले की अधिकांश समस्याओं से बिना दवा के ही राहत मिल सकती है. हालांकि अगर दर्द ज्यादा समय तक बना रहे तो चिकित्सकीय सलाह जरूर लेनी चाहिए.
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Bajra Health Benefits: सर्दी के मौसम में शरीर को गर्म रखने के लिए बहुत सारे देसी उपाय होते हैं. काढ़ा बनाने से लेकर या हल्दी वाला दूध पीने से शरीर को ठंड से बचाया जा सकता है. लेकिन ये चीजें शरीर को ऊर्जा प्रदान नहीं करतीं. ऐसे में बाजरा एक ऐसा अन्न है, जो ऊर्जा के साथ-साथ कई बीमारियों से भी बचाता है. सिर्फ खाना ही नहीं, बाजरे का पानी भी शरीर के लिए लाभकारी होता है.
बाजरा एक ग्लूटेन मुक्त अनाज है. बाजरे की तासीर गर्म होती है तो इसका इस्तेमाल मुख्यत: सर्दियों में किया जाता है, लेकिन राजस्थान में हर सीजन में बाजरे का सेवन किया जाता है. राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, बिहार, कर्नाटक, और गुजरात में बाजरे की खेती की जाती है और पशुओं को भी आहार के तौर पर दिया जाता है.
बाजरा तासीर में गर्म होने के साथ कई गुणों से भरपूर होता है. बाजरे में आयरन, फाइबर, प्रोटीन, मैग्नीशियम, कैल्शियम, जिंक और पोटेशियम होता है. इसमें विटामिन बी1, बी2, बी3 और बी6 सबसे अधिक मात्रा में पाए जाते हैं. ऐसे में बाजरा युक्त खाद्य पदार्थों को अपने खाने में शामिल करना अच्छा रहेगा. बाजरा युक्त खाद्य पदार्थ सेहत के लिए काफी फायदेमंद माने गए हैं. बाजरा युक्त खाद्य पदार्थ न सिर्फ कुपोषण दूर करने में मदद करते हैं, बल्कि ये संभावित प्रीबायोटिक और प्रोबायोटिक्स भी माने जाते हैं.
बाजरे का सेवन करने से हड्डियों को मजबूती मिलती है. बाजरे में कैल्शियम होता है, जो हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करता है. बाजरे का सेवन करने के अलग-अलग तरीके हैं. इसके लिए बाजरे की रोटी, बाजरे की टिक्की, बाजरे की रोटी और खिचड़ी बनाई जा सकती हैं. बाजरे को भिगोकर सुबह उसका पानी पीना भी फायदेमंद होता है.
बाजरे में मैग्नीशियम और पोटेशियम सही मात्रा में होते हैं, जो ब्लड शुगर को कंट्रोल करते हैं. अगर बाजरे का सेवन रोजाना सही मात्रा में किया जाए तो ये शरीर के लिए लाभकारी होगा. अगर बाजरा खाने से कब्ज की समस्या बनती है, तो एक-एक दिन छोड़कर इसका सेवन किया जा सकता है. कुछ लोगों को बाजरे से पाचन संबंधी समस्या हो सकती है. ऐसे में सेवन कम मात्रा में करें. इसके अलावा बाजरा के सेवन से डायबटिज नियंत्रित रहती है, वजन कंट्रोल रहता है, शरीर को डिटॉक्स करने में मदद मिलती है और ऊर्जा और शक्ति भी मिलती है.