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बाजरा और सेहत का है खास कनेक्शन, हड्डियों को मजबूती देने में कारगर

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फाइल फोटो

Bajra Health Benefits: सर्दी के मौसम में शरीर को गर्म रखने के लिए बहुत सारे देसी उपाय होते हैं. काढ़ा बनाने से लेकर या हल्दी वाला दूध पीने से शरीर को ठंड से बचाया जा सकता है. लेकिन ये चीजें शरीर को ऊर्जा प्रदान नहीं करतीं. ऐसे में बाजरा एक ऐसा अन्न है, जो ऊर्जा के साथ-साथ कई बीमारियों से भी बचाता है. सिर्फ खाना ही नहीं, बाजरे का पानी भी शरीर के लिए लाभकारी होता है.

बाजरा एक ग्लूटेन मुक्त अनाज है. बाजरे की तासीर गर्म होती है तो इसका इस्तेमाल मुख्यत: सर्दियों में किया जाता है, लेकिन राजस्थान में हर सीजन में बाजरे का सेवन किया जाता है. राजस्थान, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, बिहार, कर्नाटक, और गुजरात में बाजरे की खेती की जाती है और पशुओं को भी आहार के तौर पर दिया जाता है.

बाजरा तासीर में गर्म होने के साथ कई गुणों से भरपूर होता है. बाजरे में आयरन, फाइबर, प्रोटीन, मैग्नीशियम, कैल्शियम, जिंक और पोटेशियम होता है. इसमें विटामिन बी1, बी2, बी3 और बी6 सबसे अधिक मात्रा में पाए जाते हैं. ऐसे में बाजरा युक्त खाद्य पदार्थों को अपने खाने में शामिल करना अच्छा रहेगा. बाजरा युक्त खाद्य पदार्थ सेहत के लिए काफी फायदेमंद माने गए हैं. बाजरा युक्त खाद्य पदार्थ न सिर्फ कुपोषण दूर करने में मदद करते हैं, बल्कि ये संभावित प्रीबायोटिक और प्रोबायोटिक्स भी माने जाते हैं.

बाजरे का सेवन करने से हड्डियों को मजबूती मिलती है. बाजरे में कैल्शियम होता है, जो हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करता है. बाजरे का सेवन करने के अलग-अलग तरीके हैं. इसके लिए बाजरे की रोटी, बाजरे की टिक्की, बाजरे की रोटी और खिचड़ी बनाई जा सकती हैं. बाजरे को भिगोकर सुबह उसका पानी पीना भी फायदेमंद होता है.

बाजरे में मैग्नीशियम और पोटेशियम सही मात्रा में होते हैं, जो ब्लड शुगर को कंट्रोल करते हैं. अगर बाजरे का सेवन रोजाना सही मात्रा में किया जाए तो ये शरीर के लिए लाभकारी होगा. अगर बाजरा खाने से कब्ज की समस्या बनती है, तो एक-एक दिन छोड़कर इसका सेवन किया जा सकता है. कुछ लोगों को बाजरे से पाचन संबंधी समस्या हो सकती है. ऐसे में सेवन कम मात्रा में करें. इसके अलावा बाजरा के सेवन से डायबटिज नियंत्रित रहती है, वजन कंट्रोल रहता है, शरीर को डिटॉक्स करने में मदद मिलती है और ऊर्जा और शक्ति भी मिलती है.
 


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Written by: Taushif

01 Nov 2025  ·  Published: 10:10 IST

एर्दोगन ने मेलोनी को सिगरेट छोड़ने की सलाह दी, मैक्रों ने कहा– ये नामुमकिन है, वायरल हुआ वीडियो

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फाइल फोटो

मिस्र में गाजा शांति वार्ता के दौरान विश्व नेताओं की बैठक में एक दिलचस्प पल देखने को मिला. इस मुलाकात में तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप एर्दोगन, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों मौजूद थे. इसी दौरान एर्दोगन और मेलोनी के बीच हुई बातचीत का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है.

वीडियो में एर्दोगन मुस्कुराते हुए मेलोनी से कहते हैं, “मैंने तुम्हें विमान से उतरते देखा, तुम बहुत अच्छी लग रही हो, लेकिन मुझे तुम्हारा धूम्रपान बंद करवाना होगा.” तभी बगल में खड़े मैक्रों तुरंत मजाक में कहते हैं, “यह नामुमकिन है.” यह सुनकर मेलोनी जोर से हंस पड़ती हैं और कहती हैं, “मुझे पता है, लेकिन अगर मैंने सिगरेट छोड़ दी तो मैं कम मिलनसार हो जाऊंगी. मैं किसी को मारना नहीं चाहती.”

यह मजाकिया बातचीत भले ही हल्के-फुल्के अंदाज़ में हुई हो, लेकिन इसके पीछे एक गंभीर संदेश छिपा है. स्मोकिंग की बढ़ती आदत और उससे होने वाले खतरे.

दरअसल, जॉर्जिया मेलोनी ने एक किताब में बताया था कि उन्होंने 13 साल तक सिगरेट छोड़ रखी थी, लेकिन कुछ समय पहले फिर से शुरू कर दी. उनका कहना था कि सिगरेट पीना कभी-कभी बातचीत और कूटनीतिक रिश्ते सुधारने का जरिया बन जाता है. हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि यह सोच बेहद गलत और खतरनाक है. आज स्मोकिंग युवाओं में फैशन सिंबल बन चुकी है. कई टीनेजर्स और युवा मानते हैं कि सिगरेट पीना उन्हें ज्यादा परिपक्व या कूल दिखाता है. फिल्मों और सोशल मीडिया पर इसे ग्लैमरस अंदाज़ में दिखाया जाता है, जिससे भ्रम और बढ़ता है.

विशेषज्ञों का कहना है कि पीयर प्रेशर यानी दोस्तों के दबाव में आकर और तनाव से राहत पाने की गलत सोच के कारण युवा स्मोकिंग की लत में फंसते जा रहे हैं. सिगरेट में मौजूद निकोटीन कुछ देर के लिए शांति का एहसास देता है, लेकिन बाद में बेचैनी और तनाव को और बढ़ा देता है. लंबे समय तक इसका सेवन कैंसर, फेफड़ों और दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ा देता है.


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Written by: Taushif

15 Oct 2025  ·  Published: 11:10 IST

पैर में झनझनाहट हो तो सावधान! यह हो सकता है गंभीर बीमारी का लक्षण

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Health News: अगर आपके पैरों में बार-बार सुई चुभने जैसी सनसनी या झनझनाहट महसूस होती है, तो इसे हल्के में न लें। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक यह लक्षण सिर्फ सामान्य थकान नहीं, बल्कि किसी बड़ी बीमारी का संकेत भी हो सकता है।

पैर में झनझनाहट की सबसे आम वजह लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठे रहना या पैर दबा कर बैठना होता है, जिससे नसों पर दबाव पड़ता है और रक्त संचार प्रभावित होता है। हालांकि लगातार झनझनाहट रहना कई बार डायबिटीज, विटामिन B12 की कमी, या न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर का संकेत भी हो सकता है।

डॉक्टरों का कहना है कि डायबिटिक न्यूरोपैथी, साइयाटिका, या थायरॉइड संबंधी गड़बड़ियों के मरीजों में यह लक्षण आम है। साथ ही अत्यधिक शराब और धूम्रपान करने वालों में भी नसों की कार्यक्षमता प्रभावित होती है जिससे झनझनाहट हो सकती है।

लक्षणों में पैरों में सुन्नपन, जलन, चलने में परेशानी और कमजोरी शामिल हैं। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि यदि यह समस्या अक्सर हो रही है, तो तुरंत न्यूरोलॉजिस्ट से संपर्क करें।

उपचार के तौर पर संतुलित आहार, विटामिन B12 युक्त भोजन (जैसे अंडा, दूध, पत्तेदार सब्ज़ियां), और नियमित व्यायाम को जरूरी बताया गया है।

स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि यह एक बढ़ती हुई आम समस्या बनती जा रही है, जिसे नजरअंदाज करना भविष्य में गंभीर रूप ले सकता है।


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Written by: Taushif

24 Jul 2025  ·  Published: 06:12 IST

जावित्री सिर्फ स्वाद नहीं बढ़ाती, शरीर की कई बीमारियों से भी देती है सुरक्षा

प्रतीकात्मक फोटो

फाइल फोटो

Javitri Benefits: जावित्री, जायफल का बाहरी लाल रंग का आवरण होता है. इसका टेस्ट थोड़ा तीखा और बेहद खुशबूदार होता है, इसलिए इसे मसालों में खास जगह दी जाती है. आयुर्वेद में इसे गर्म तासीर वाला माना जाता है. आम भाषा में कहें तो जावित्री शरीर को गर्माहट देती है और पाचन को तेज करती है. खाने का स्वाद बढ़ाने के साथ ही ये आपके सेहत का भी ख्याल रखता है. पुराने समय से लोग इसे मन को प्रसन्न रखने, भूख बढ़ाने और शरीर को हल्का महसूस कराने वाली चीज के रूप में भी इस्तेमाल करते आए हैं.

पुरानी घरेलू विधियों में जावित्री को पेशाब ज्यादा आने या बार-बार लगने की समस्या में इस्तेमाल किया जाता था. लोग इसका थोड़ा-सा चूर्ण खांड या मिश्री के साथ पानी या दूध में मिलाकर पीते थे. नपुंसकता जैसी समस्याओं में भी पुराने वैद्य जावित्री, जायफल, बड़ी इलायची और थोड़ी सी अफीम मिलाकर बनाई गई औषधि का उपयोग करते थे, लेकिन आज के समय में ऐसे मिश्रण बिना डॉक्टर की सलाह के बिल्कुल नहीं लेने चाहिए.

श्वास या दमे जैसी दिक्कतों में जावित्री को पान में रखकर खाने का चलन भी पुराने समय में देखा गया है. दांत के दर्द में इसे माजूफल व कुटकी के साथ उबालकर कुल्ला करने के लिए कहा जाता था. दस्त, पेचिश या बार-बार टट्टी होने पर जावित्री को छाछ या दही के साथ देने की परंपरा भी रही है. गठिया यानी जोड़ों के दर्द में जावित्री के साथ सोंठ को गर्म पानी के साथ लेने से लाभ मिलता है. हृदय को मजबूत बनाने के लिए दालचीनी, अकरकरा और जावित्री का चूर्ण शहद के साथ लेने की सलाह दी जाती थी.

चेचक (मसूरिका/माता) जैसी बीमारियों में भी इसे बहुत बारीक पीसकर छोटी मात्रा में देने की पुरानी मान्यता बताई जाती है. ध्यान रखने वाली सबसे जरूरी बात यह है कि जावित्री का अधिक मात्रा में सेवन करना आपके लिए नुकसानदायक हो सकता है. इससे सिरदर्द या घबराहट जैसे लक्षण हो सकते हैं.
 


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Written by: Taushif

21 Nov 2025  ·  Published: 21:56 IST