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Yellow Phlegm Ayurvedic Treatment: सर्दियों का मौसम आते ही बच्चों से लेकर बड़े तक संक्रमण, सर्दी-बुखार और जकड़न का शिकार हो जाते हैं. सर्दियों के मौसम में सबसे ज्यादा शरीर में कफ बनने की परेशानी होती है. कई बार कफ का रंग पीला हो जाता है, जो शरीर में पनप रहे संक्रमण या सूजन की तरफ इशारा करता है. हालांकि कफ बनने के शुरुआती दिन में डरने वाली कोई बात नहीं होती है, लेकिन अगर कफ 10 या उससे ज्यादा दिन तक पीले रंग का निकल रहा है और उसके साथ बुखार और सर्दी के लक्षण हैं, तो ऐसे में डॉक्टर की सलाह जरूर लें.
आयुर्वेद में इसे कफ और पित्त दोष के संतुलन के तौर पर देखा जाता है. जब हमारी शरीर की श्वेत रक्त कोशिकाएं शरीर में मौजूद संक्रमण से लड़ती हैं और नष्ट हो जाती हैं, तो कफ का रंग पीला होता है. ये संकेत देता है कि हमारा शरीर इंफ्लेमेशन और संक्रमण से लड़ रहा है.
आयुर्वेद में कफ से निपटने के लिए कई घरेलू और देसी उपाय बताए गए हैं, जिनके निरंतर प्रयास से शरीर में कफ जमने की समस्या को धीमा किया जा सकता है, जैसे भाप लेना. भाप लेने से शरीर में जकड़न और कफ दोनों से राहत मिलती है. भाप लेते समय एक बात का ध्यान रखें कि जब भी कफ की समस्या बने तो मुंह खोलकर भाप अंदर की तरफ लेनी चाहिए, इससे कफ बाहर आना शुरू हो जाता है. लोग नाक के जरिए भाप को लेने की कोशिश करते हैं, जो गलत है.
हल्दी वाला दूध भी कफ में राहत देता है. रात में कच्ची हल्दी और दूध को साथ में उबालकर लेने से लाभ मिलता है. इससे शरीर गर्म रहता है और कफ निकलने लगता है. हल्दी कफ की वजह से होने वाली सूजन को भी कम करने का काम करती है. मुलेठी एक ऐसी औषधि है जिसे एक नहीं बल्कि कई रोगों में काम में लिया जाता है.
खांसी से लेकर बुखार तक को ठीक करने में मुलेठी का इस्तेमाल किया जाता है. मुलेठी का काढ़ा बनाकर सुबह और शाम लिया जा सकता है या दिन के समय मुलेठी को चबाया जा सकता है. इसके अलावा, तुलसी का अर्क शहद के साथ लिया जा सकता है. इसके लिए तुलसी के पत्तों को पीसकर उसमें शहद और सोंठ मिलाकर हल्का गुनगुना कर लें. दिन में तीन बार इसका सेवन किया जा सकता है. ये नुस्खा बच्चों से लेकर बड़ों तक के लिए फायदेमंद है.
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Lemon Water Benefits: नींबू पानी को लंबे समय से स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद माना जाता है. यह शरीर को हाइड्रेटेड रखने का एक आसान और स्वादिष्ट तरीका है. साधारण पानी भी उतना ही महत्वपूर्ण है, लेकिन कई लोग इसमें नींबू मिलाकर पीना पसंद करते हैं, क्योंकि हल्का खट्टा स्वाद उन्हें ज़्यादा पानी पीने के लिए प्रेरित करता है. एक्सपर्ट्स का कहना है कि शरीर की हर कोशिका को पानी की ज़रूरत होती है और स्वाद के कारण कुछ लोगों में पानी पीने की आदत बेहतर हो जाती है.
विटामिन C का हल्का डोज़
नींबू विटामिन C का प्राकृतिक स्रोत है, जो इम्यून सिस्टम और त्वचा की सेहत के लिए जरूरी पोषक तत्व है. एक गिलास नींबू पानी दिनभर की ज़रूरत को पूरा नहीं करता, लेकिन यह सुबह-सुबह पोषण का हल्का डोज़ देने जैसा असर डाल सकता है. जिन लोगों में पेट में एसिड की कमी होती है, उन्हें इसका खट्टापन पाचन प्रक्रिया शुरू करने में मदद कर सकता है. हालांकि यह सबके लिए सही नहीं है, इसलिए अपने शरीर की प्रतिक्रिया देखकर ही इसे अपनाएं.
तापमान का ध्यान रखें
नींबू पानी बनाते समय ज़्यादा गर्म पानी का इस्तेमाल करने से बचें, क्योंकि इससे विटामिन C की गुणवत्ता घट सकती है. हल्का गुनगुना पानी सबसे अच्छा रहता है. इतना गर्म कि पीना आरामदायक हो लेकिन उबलता हुआ न हो. इस तरह नींबू पानी अपने प्राकृतिक लाभ बनाए रखता है.
कब नुकसान कर सकता है
नींबू का एसिडिक स्वभाव कुछ लोगों के लिए समस्या पैदा कर सकता है. खासकर जिन्हें एसिड रिफ्लक्स, पेट दर्द या जलन की शिकायत रहती है, उन्हें सावधान रहना चाहिए. बिना सोचे-समझे किसी ट्रेंड को अपनाने से पहले अपने शरीर के संकेतों को समझना जरूरी है.
दांतों की सुरक्षा
बार-बार नींबू पानी पीने से दांतों की ऊपरी परत (इनेमल) कमजोर हो सकती है, जिससे संवेदनशीलता बढ़ने का खतरा रहता है. दांतों को सुरक्षित रखने के लिए इसे स्ट्रॉ से पीना या बाद में सादे पानी से कुल्ला करना बेहतर उपाय है.
डिटॉक्स का मिथक
कई लोग नींबू पानी को डिटॉक्स ड्रिंक मानते हैं, लेकिन एक्सपर्ट्स के मुताबिक शरीर का प्राकृतिक डिटॉक्सीफिकेशन लिवर और किडनी खुद करते हैं. नींबू पानी हाइड्रेशन और पाचन में मददगार हो सकता है, पर इसे जादुई डिटॉक्स पेय न समझें.
एक्सपर्ट्स कहते हैं कि सुबह की शुरुआत एक गिलास नींबू पानी से करने से शरीर को काम शुरू करने का संकेत मिलता है और दिनभर तरोताज़ा महसूस होता है, लेकिन संतुलन और सावधानी जरूरी है.
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Cinnamon Tea for Diabetes: डायबिटीज ऐसी बीमारी है जो धीरे-धीरे शरीर को कमजोर करती जाती है. लेकिन भारतीय रसोई में मौजूद कई मसाले इस बीमारी को नियंत्रित करने में मदद कर सकते हैं. इन्हीं में से एक है दालचीनी, जिसे आयुष मंत्रालय ने डायबिटीज मरीजों के लिए खास फायदेमंद बताया है.
भारत में डायबिटीज तेजी से बढ़ रही है, ऐसे में आयुष मंत्रालय प्राकृतिक और घरेलू उपाय अपनाने की सलाह देता है. दालचीनी की चाय न सिर्फ स्वादिष्ट होती है, बल्कि यह ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में भी मदद करती है. दालचीनी में ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो इंसुलिन की कार्यक्षमता बढ़ाते हैं, जिससे शरीर ग्लूकोज को बेहतर तरीके से इस्तेमाल कर पाता है.
नियमित रूप से दालचीनी की चाय पीने से ब्लड शुगर का लेवल स्थिर रहता है और अचानक बढ़ने-घटने की समस्या कम होती है. यह चाय कोलेस्ट्रॉल को संतुलित करने में भी मदद करती है. खराब कोलेस्ट्रॉल कम होने से दिल की बीमारियों का जोखिम घटता है, जो डायबिटीज मरीजों में आम समस्या है. दालचीनी में एंटीऑक्सीडेंट और एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण भी होते हैं, जो शरीर में सूजन कम करते हैं और इम्यूनिटी को मजबूत बनाते हैं.
दालचीनी की चाय बनाने का आसान तरीका
सबसे पहले एक कप पानी लें और इसमें आधा चम्मच दालचीनी पाउडर या एक छोटी दालचीनी की स्टिक डालें. इसके बाद 5–10 मिनट तक उबालें, छानकर गर्म-गर्म पिएं. साथ ही चाहें तो थोड़ा शहद या नींबू मिला सकते हैं.
नोट
दालचीनी फायदेमंद है, लेकिन यह दवा का विकल्प नहीं है। शुगर मरीजों को अपनी दवा, डाइट और एक्सरसाइज जारी रखना जरूरी है. दालचीनी की चाय का सेवन डॉक्टर की सलाह के साथ ही करना चाहिए. गर्भवती महिलाएं और गंभीर मरीज इसे लेने से पहले डॉक्टर से परामर्श जरूर लें.
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Kidney Disease Symptoms on Face: किडनी हमारे शरीर का बेहद जरूरी अंग है. यह शरीर से वेस्ट मटीरियल, टॉक्सिन्स और अतिरिक्त पानी को बाहर निकालने का काम करती है. अगर किडनी बीमार हो जाए तो शरीर में टॉक्सिन्स जमा होने लगते हैं, जिससे हाई ब्लड प्रेशर, दिल की बीमारी और डायबिटीज जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं.
अगर समय रहते इलाज न मिले तो किडनी धीरे-धीरे काम करना बंद कर देती है और किडनी फेलियर की स्थिति आ जाती है. इस अवस्था में मरीज को डायलिसिस या ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ सकती है.
किडनी खराब होने पर चेहरे पर दिखने वाले शुरुआती संकेत
हेल्थ वेबसाइट Medical News Today के मुताबिक, किडनी की बीमारी के शुरुआती चरण में कई बार लक्षण नजर नहीं आते, लेकिन जैसे-जैसे स्थिति बिगड़ती है, शरीर में वेस्ट जमा होने लगता है और कुछ लक्षण दिखने लगते हैं.
1. चेहरे और आंखों के नीचे सूजन
अगर सुबह उठने पर आपका चेहरा या आंखों के नीचे सूजन नजर आती है, तो यह किडनी डैमेज का संकेत हो सकता है. किडनी ठीक से टॉक्सिन्स और लिक्विड्स को फिल्टर नहीं कर पाती, जिससे शरीर में फ्लूड रिटेंशन होता है.
2. त्वचा में खुजली और सूखापन
किडनी खराब होने पर शरीर में वेस्ट जमा हो जाते हैं. इसका असर त्वचा पर भी दिखता है. त्वचा रूखी हो जाती है और खुजली होने लगती है.
3. चेहरे का पीलापन
किडनी रेड ब्लड सेल्स के निर्माण में मदद करती है. जब किडनी कमजोर पड़ती है, तो खून की कमी (एनीमिया) होने लगती है और चेहरा पीला दिखने लगता है.
किडनी डैमेज के अन्य लक्षण
लक्षण दिखने पर क्या करें
अगर आपको या आपके किसी करीबी को ये लक्षण लगातार दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें. खासकर जिन लोगों को हाई ब्लड प्रेशर या डायबिटीज है, उन्हें नियमित रूप से किडनी की जांच करानी चाहिए.
ध्यान रखें
किडनी की बीमारी में पानी पीना जरूरी है, लेकिन ज्यादा मात्रा में पानी लेना भी नुकसानदायक हो सकता है. हमेशा डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही पानी पिएं.