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सिर्फ 3 दिन में मसूड़ों की सूजन गायब! जानें कौन से हैं आयुर्वेद के रामबाण नुस्खे

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Ayurvedic Remedies for Swollen Gums: मुस्कान तभी खूबसूरत लगती है जब दांत और मसूड़े दोनों स्वस्थ हों, लेकिन अगर मसूड़ों में सूजन, दर्द या खून आने लगे, तो यह जिंजीवाइटिस का संकेत है. यह समस्या आमतौर पर मुंह की सफाई में लापरवाही, बहुत गर्म या ठंडी चीजें खाने, सख्त वस्तु चबाने, विटामिन सी की कमी या धूम्रपान-तंबाकू जैसी आदतों से होती है.

आयुर्वेद के अनुसार, यह रोग पित्त और रक्त दोष के बढ़ने से होता है, जिससे मसूड़ों के ऊतकों में सूजन और कमजोरी आ जाती है. अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए तो यह मसूड़ों से खून आने, दांतों के हिलने या गिरने जैसी गंभीर समस्या का कारण बन सकता है. इसके लिए आयुर्वेद में कुछ बेहद असरदार और सरल घरेलू नुस्खे बताए गए हैं.

सबसे पहला उपाय है फिटकरी, सेंधा नमक, हरड़ और काली मिर्च का मंजन. इन सभी को बराबर मात्रा में कूटकर मंजन बना लें और रोज सुबह-शाम हल्के हाथों से मसूड़ों पर मलें. इससे सूजन और दर्द में आराम मिलता है और मसूड़े मजबूत बनते हैं. दूसरा आसान उपाय है सोंठ (सूखी अदरक) का सेवन. तीन ग्राम सोंठ का चूर्ण गुनगुने पानी के साथ दिन में दो बार लेने से सूजन और दर्द दोनों में राहत मिलती है.

अगर मसूड़ों से खून आ रहा हो, तो जली हुई सुपारी का चूर्ण भी बहुत उपयोगी है. इसे मंजन की तरह इस्तेमाल करें, इससे मसूड़े सख्त बनते हैं और खून आना बंद होता है. इसके अलावा, सेंधा नमक और मीठा सोडा को पानी में मिलाकर कुल्ला करने से तुरंत राहत मिलती है. प्याज का रस भी काफी फायदेमंद है. इसमें मौजूद सल्फर बैक्टीरिया को खत्म करते हैं.

त्रिफला क्वाथ भी एक असरदार उपाय है. हरड़, बहेड़ा और आंवला को पानी में उबालकर उसका काढ़ा बनाएं और उससे दिन में 2–3 बार गरारा करें. यह मसूड़ों की सूजन, दर्द और खून बहने की समस्या को खत्म करता है. रोजमर्रा की देखभाल के लिए सुबह-शाम ब्रश करने के बाद तिल तेल से ऑयल पुलिंग करें. खाने के बाद कुल्ला करने की आदत डालें. मसालेदार और बहुत गर्म खाना खाने से बचें और पाचन को दुरुस्त रखें, क्योंकि पेट की गड़बड़ी से भी मसूड़ों में सूजन बढ़ती है.
 


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Written by: Taushif

10 Nov 2025  ·  Published: 10:46 IST

सर्दियों में कम पानी पीना पड़ सकता है भारी, जानें कौन-कौन सी बीमारियों का बढ़ जाता है खतरा

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Winter Dehydration Risks: सर्दियां शुरू होते ही शरीर की प्यास अपने आप कम होने लगती है. ठंड की वजह से लोग पानी पीना भूल जाते हैं या ठंडे पानी के डर से बहुत कम पानी पीते हैं. लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि यह आदत लंबे समय में शरीर को नुकसान पहुंचा सकती है. खासतौर पर यदि कोई व्यक्ति रोज़ 500 मिली लीटर से भी कम पानी पी रहा है, तो उसे कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा हो सकता है. आइए जानें कम पानी पीने से शरीर पर कैसा असर पड़ता है.

1. किडनी की फिल्टरेशन क्षमता कम होना
बहुत कम पानी पीने से किडनी को शरीर के अपशिष्ट पदार्थ निकालने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है. इससे यूरिन गाढ़ा हो जाता है और शरीर में टॉक्सिन जमा होने लगते हैं. यह स्थिति आगे चलकर किडनी को नुकसान पहुंचा सकती है.

2. दिमाग तक ऑक्सीजन की कमी
कम पानी पीने से ब्लड वॉल्यूम घटता है, जिससे दिमाग तक पहुंचने वाली ऑक्सीजन भी कम हो जाती है. इसका असर फोकस, मूड और ऊर्जा पर पड़ता है. व्यक्ति को चिड़चिड़ापन, थकान और ध्यान की कमी का अनुभव हो सकता है.

3. मसल्स का थकना और दर्द बढ़ना
पानी शरीर की मसल्स को ऊर्जा देता है. कम पानी पीने पर मसल्स कमजोर महसूस होने लगते हैं. थोड़ी-सी मेहनत में थकावट आ जाती है और मसल्स सोरनेस बढ़ सकती है.

4. डाइजेशन धीमा होना
पानी पाचन प्रक्रिया में बड़ा रोल निभाता है. यदि शरीर में पानी की कमी हो जाए तो खाना पचने में दिक्कत आती है. इससे कब्ज, गैस और अपच जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं. भूख भी कम लगने लगती है.

5. लंबे समय में कई क्रॉनिक बीमारियों का खतरा
लगातार कम पानी पीने से शरीर पर स्ट्रेस बढ़ता है. यूरिन का रंग गहरा हो जाता है, किडनी की फिल्टरेशन रेट धीमी हो जाती है और शरीर का तापमान नियंत्रित करने की क्षमता भी प्रभावित होती है. लंबे समय में यह आदत किडनी, दिल और ब्रेन से जुड़ी गंभीर बीमारियों की वजह बन सकती है.

कैसे बचें?
सर्दियों में भी दिनभर 6–8 गिलास पानी जरूर पिएं. गरम पानी या हर्बल चाय का सेवन बढ़ाएं. प्यास न लगे तब भी थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पानी पीते रहें.


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Written by: Taushif

18 Nov 2025  ·  Published: 11:29 IST

शादी से पहले पाएं नेचुरल ब्राइडल ग्लो, अपनाएं दादी-नानी के 5 देसी उबटन

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Bridal Glow: हर लड़की चाहती है कि अपनी शादी के दिन वह सबसे खूबसूरत दिखे. इसके लिए कई लोग पार्लर ट्रीटमेंट या महंगे स्किनकेयर प्रोडक्ट्स का सहारा लेते हैं, लेकिन असली निखार तो दादी-नानी के पुराने नुस्खों में छिपा होता है. उन्हीं में से एक है. उबटन, जो सदियों से भारतीय परंपरा का हिस्सा रहा है.

उबटन एक नैचुरल स्क्रब और फेस मास्क होता है, जो त्वचा को गहराई से साफ करने के साथ-साथ उसे मुलायम और ग्लोइंग बनाता है. इसमें हल्दी, बेसन, चंदन, दूध, बादाम, ओटमील और नीम जैसी चीजें मिलाई जाती हैं, जो बिना किसी साइड इफेक्ट के चेहरे को नेचुरल ब्राइटनेस देती हैं. आइए जानते हैं ऐसे 5 असरदार देसी उबटन, जो आपकी स्किन को शादी से पहले ब्राइडल ग्लो दे सकते हैं.

1. हल्दी और चंदन का उबटन
हल्दी में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीसेप्टिक गुण पिगमेंटेशन और दाग-धब्बों को कम करते हैं. चंदन पाउडर के साथ मिलाने पर यह त्वचा के पोर्स टाइट करता है और झुर्रियों को कम करने में मदद करता है. यह उबटन स्किन टोन को निखारकर चेहरे पर नेचुरल ग्लो लाता है.

2. मूंग दाल और बेसन का उबटन
मूंग दाल और बेसन दोनों ही स्किन को भीतर से पोषण देते हैं. इनमें मौजूद विटामिन A, B और C त्वचा की डलनेस कम करते हैं और रंगत निखारते हैं. इसे हफ्ते में 3 बार लगाने से ब्राइडल ग्लो साफ नजर आता है.

3. बादाम और दूध का उबटन
बादाम त्वचा को सॉफ्ट बनाते हैं और मुंहासों को कम करते हैं. कुछ बादाम को दूध में भिगोकर पीस लें और चेहरे पर लगाएं. यह उबटन स्किन को एक्सफोलिएट करता है, टैनिंग हटाता है और चेहरा फ्रेश दिखाता है.

4. ओटमील और बेसन का उबटन
ओटमील सेंसिटिव स्किन के लिए फायदेमंद है. यह स्किन को हाइड्रेट और डीप क्लीन करता है. बेसन के साथ मिलाने पर यह ऑयल कंट्रोल करता है और चेहरा दमकता हुआ बनाता है.

5. नीम और ऐलोवेरा का उबटन
नीम में एंटीबैक्टीरियल गुण होते हैं जो पिंपल्स और इंफेक्शन से बचाते हैं. इसमें ऐलोवेरा मिलाने से त्वचा साफ, हेल्दी और पिंपल-फ्री रहती है.


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Written by: Taushif

07 Nov 2025  ·  Published: 11:45 IST

बरसात के मौसम में क्यों बढ़ जाता है स्किन इंफेक्शंस का खतरा? जानें इनसे बचने का तरीका

प्रतीकात्मक फोटो

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Monsoon Skin Problems: मानसून अपने साथ सुहावनी बारिश और ठंडी हवाएँ लेकर आता है, लेकिन इस मौसम में स्किन संबंधी कई गंभीर समस्याएँ भी तेज़ी से बढ़ने लगती हैं। बढ़ती नमी और गीले कपड़े शरीर को बैक्टीरिया और फंगस के लिए आदर्श स्थान बना देते हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, मानसून में स्किन संक्रमण के मामले 40 फीसद तक बढ़ जाते हैं। सबसे आम समस्याएँ हैं. एथलीट फुट, दाद, एरिथ्रास्मा, फॉलिकुलिटिस और घमौरियाँ।

एथलीट फुट एक फंगल संक्रमण है जो गीले मोज़े या बंद जूते पहनने से होता है। इससे खुजली, स्किन फटना और पैर की उंगलियों के बीच जलन हो सकती है। इससे बचने के लिए, पैरों को हमेशा साफ़ और सूखा रखें और एंटीफंगल पाउडर लगाएँ।

दाद एक और आम फंगल संक्रमण है जो त्वचा पर गोल आकार के लाल चकत्ते के रूप में दिखाई देता है। इससे तेज़ खुजली होती है। दाद से बचने के लिए, ढीले सूती कपड़े पहनें, शरीर को सूखा रखें और संक्रमण होने पर एंटीफंगल क्रीम का इस्तेमाल करें।

एरिथ्रास्मा एक जीवाणु संक्रमण है जो बगल, कमर या उंगलियों के बीच भूरे या गुलाबी धब्बों के रूप में दिखाई देता है। इससे बचने के लिए, रोज़ाना एंटीबैक्टीरियल साबुन से नहाएँ और त्वचा की नमी को सूखने न दें।

फॉलिकुलिटिस पसीने और घर्षण के कारण बालों की जड़ों में सूजन और लाल फुंसियाँ पैदा करता है। इससे बचने के लिए एलोवेरा जेल या हल्के स्क्रब का इस्तेमाल करें।

स्किन के बंद रोमछिद्रों में पसीने के फंस जाने से घमौरियाँ होती हैं। गर्दन, छाती और पीठ पर छोटे-छोटे लाल या सफेद फुंसियाँ निकल आती हैं। इससे बचने के लिए, ढीले कपड़े पहनें, ठंडे पानी से नहाएँ और कैलामाइन लोशन लगाएँ।

नोट- अगर संक्रमण 7-14 दिनों में ठीक न हो, दर्द हो या दाने फैलने लगें, तो डॉक्टर से सलाह लें। अगर आपको मधुमेह या कमज़ोर रोग प्रतिरोधक क्षमता है, तो विशेष ध्यान रखें।


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Written by: Taushif

21 Jul 2025  ·  Published: 05:28 IST