How to start Datacenter or Domain and hosting business ?
Top Digital Marketing Companies
Top Flutter App Development Companies
How to earn money Online ?
How to start Ecommerce business ?
इंसानी खोपड़ियों से बने बर्तन, मानव त्वचा की कुर्सियां; अमेरिका का सबसे खौफनाक सीरियल किलर
BBDS App Download
× Bindass Bol Home About News Contact Search

अदरक-लहसुन का पेस्ट हफ्तों तक कैसे रखें फ्रेश? जानिए आसान टिप्स

File

फाइल फोटो

How to Preserve Ginger Garlic Paste: भारतीय रसोई में अदरक-लहसुन का पेस्ट एक बेहद ज़रूरी चीज़ है. यह पेस्ट खाने को न सिर्फ स्वादिष्ट बनाता है, बल्कि इसकी खुशबू भी खाने में जान डाल देती है लेकिन एक आम परेशानी ये होती है कि ये पेस्ट कुछ ही दिनों में खराब हो जाता है या इसका रंग बदलने लगता है. कई बार जब हम इसका जार खोलते हैं तो उसमें से अजीब गंध आती है या पेस्ट हरा हो गया होता है. अगर आप भी इस समस्या से परेशान हैं और चाहते हैं कि आपका अदरक-लहसुन पेस्ट लंबे समय तक ताजा और सुरक्षित बना रहे, तो नीचे दिए गए ये आसान टिप्स आपके बहुत काम आएंगे.

1. नेचुरल प्रिजर्वेटिव मिलाएं
पेस्ट बनाते समय फ्रेश अदरक और लहसुन लें और साफ फूड प्रोसेसर में पीस लें. इसमें एक चुटकी नमक, एक बड़ा चम्मच तेल और एक बड़ा चम्मच सफेद सिरका मिलाएं. सिरका और नमक बैक्टीरिया को पनपने नहीं देते और तेल पेस्ट को मुलायम बनाता है. ये मिश्रण पेस्ट को काला होने और जल्दी खराब होने से भी बचाता है.

2. पेस्ट को सूखा रखें
पेस्ट बनाते समय पानी न मिलाएं. पानी डालने से उसमें नमी बढ़ती है, जिससे बैक्टीरिया जल्दी पनपते हैं और पेस्ट खराब हो जाता है. अगर पेस्ट बहुत गाढ़ा लगे तो थोड़ा सा तेल मिलाएं, लेकिन कभी भी पानी का इस्तेमाल न करें.

3. सही तरह से फ्रिज में स्टोर करें
पेस्ट को एक साफ, सूखे और एयरटाइट कंटेनर में भरकर फ्रिज में रखें. हर बार पेस्ट निकालते समय सूखे और साफ चम्मच का इस्तेमाल करें. अगर ठीक से रखा जाए तो ये पेस्ट 2-3 हफ्तों तक फ्रेश रह सकता है.

4. लंबे समय तक रखने के लिए फ्रीज करें
अगर आप पेस्ट को 1-2 महीने तक ताजा रखना चाहते हैं तो उसे फ्रीज करें. इसके लिए पेस्ट को आइस क्यूब ट्रे में भरें और जमा लें. जब जम जाए तो क्यूब्स को जिपलॉक बैग या एयरटाइट डिब्बे में स्टोर करें. ज़रूरत के समय एक क्यूब निकालें और सीधे इस्तेमाल करें.

5. इन बातों का जरूर रखें ध्यान
अगर पेस्ट का रंग बदल गया है, अजीब गंध आ रही है या उसका स्वाद बदल गया है तो उसे फेंक दें. पेस्ट में कभी भी गीला चम्मच न डालें, इससे बैक्टीरिया जल्दी पनपते हैं.


BBDS Logo

Bindass Bol Dil Se

Written by: Taushif

04 Aug 2025  ·  Published: 07:05 IST

देसी घी: भारत का असली सुपरफूड, जो स्वाद और सेहत दोनों का रखे ख्याल

File

फाइल फोटो

Desi ghee benefits: देसी घी सिर्फ खाने को स्वादिष्ट बनाने के लिए नहीं होता, बल्कि सदियों से इसे भारत में ताकत, ऊर्जा और लंबी उम्र का सबसे बड़ा स्रोत माना गया है. आज आधुनिक विज्ञान भी यह मानता है कि देसी गाय का घी दुनिया के सबसे पौष्टिक खाद्य पदार्थों में शामिल है. देसी घी में CLA, ब्यूट्रेट, ओमेगा-3 फैटी एसिड, विटामिन A, D, E, K2 और कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो इसे एक तरह की प्राकृतिक औषधि बना देते हैं. आयुर्वेद में इसे “योगवाही” कहा गया है, यानी यह दूसरी दवाओं के असर को और बढ़ा देता है.

पाचन के लिए अमृत
घी का सबसे बड़ा फायदा है कि यह पाचन को मजबूत बनाता है. इसमें मौजूद ब्यूट्रिक एसिड आंतों को ठीक करता है, गैस-एसिडिटी शांत करता है और इरिटेबल बाउल सिंड्रोम में राहत देता है. घी ‘अग्नि’ यानी डाइजेशन पावर को बढ़ाता है.

दिमाग के लिए वरदान
घी मस्तिष्क को स्निग्धता देता है, जिससे याददाश्त बेहतर होती है, मानसिक तनाव कम होता है और फोकस बढ़ता है. घी को आयुर्वेद में ‘मेध्य रसायन’ यानी दिमाग का टॉनिक कहा गया है.

हार्मोन बैलेंस के लिए फायदेमंद
महिलाओं में PCOD, थायरॉयड और पीरियड संबंधित समस्याओं में घी के अच्छे परिणाम देखे जाते हैं, क्योंकि यह हार्मोन संतुलन में मदद करता है.

हड्डियों और जोड़ों के लिए श्रेष्ठ
घी में मौजूद विटामिन K2 कैल्शियम को सही जगह यानी हड्डियों में जमने में मदद करता है.
इससे हड्डियां मजबूत होती हैं, जोड़ों का दर्द कम होता है और शरीर में स्नेहन बढ़ता है.

सर्दियों में खास लाभ
घी शरीर को अंदर से गर्म रखता है, साथ ही वायरल इंफेक्शन से बचाता है और इम्युनिटी मजबूत करता है.
 


BBDS Logo

Bindass Bol Dil Se

Written by: Taushif

26 Nov 2025  ·  Published: 10:31 IST

हार्मोन बिगड़े तो मन भी टूटता है! आयुर्वेद बताए डिप्रेशन से निकलने का रास्ता

File

फाइल फोटो

Hormonal Imbalance and Depression: जब हार्मोनल असंतुलन के कारण मन में लगातार भारीपन महसूस होता है, एनर्जी की कमी होती है और बार-बार मूड स्विंग होते हैं, तो इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए. आयुर्वेद इसे सिर्फ़ एक मानसिक समस्या नहीं मानता, बल्कि यह शरीर और मन दोनों को प्रभावित करने वाला एक विकार है, खासकर थायराइड, कोर्टिसोल और न्यूरो-हार्मोन पर असर डालता है.

जब थायराइड अंडरएक्टिव होता है, तो शरीर सुस्त महसूस होता है और मन सुस्त हो जाता है. कोर्टिसोल का स्तर बढ़ने से तनाव, चिंता और डर होता है, जो धीरे-धीरे डिप्रेशन जैसे लक्षणों के रूप में सामने आते हैं. आयुर्वेद के मुताबिक, यह मुख्य रूप से वात और तमस दोषों के असंतुलन के कारण होता है. वात बढ़ने से फोकस कम होता है, नींद खराब होती है, और मूड अस्थिर रहता है. तमस बढ़ने से मन में भारीपन और थकान महसूस होती है.

आयुर्वेद में कई जड़ी-बूटियां ऐसी स्थितियों में मदद करती हैं. अश्वगंधा तनाव कम करता है और कोर्टिसोल के स्तर को संतुलित करता है, जिससे नींद में सुधार होता है. शंखपुष्पी दिमाग को शांत करती है और मूड को स्थिर करती है. जटामांसी गहरी नींद और मानसिक स्थिरता को बढ़ावा देती है. ब्राह्मी फोकस बढ़ाती है और मन को हल्का करती है. कुमारी (एलोवेरा) थायराइड फंक्शन को संतुलित करने में मदद करती है.

आयुर्वेद में थायराइड असंतुलन अग्नि (पाचन अग्नि) और धातु-पोषण (ऊतकों के पोषण) से जुड़ा है. जब अग्नि कमजोर होती है, तो मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है, मन भारी महसूस होता है और थकान बढ़ जाती है. योग और प्राणायाम भी हार्मोन को संतुलित करने में मदद करते हैं. अनुलोम-विलोम, भ्रामरी, उज्जायी प्राणायाम, सूर्य नमस्कार, और शशांकासन तंत्रिका तंत्र को शांत करते हैं और मूड में सुधार करते हैं. 

इस आहार को लें
आहार में हल्के, आसानी से पचने वाले खाद्य पदार्थ, तिल के बीज, बादाम, घी, गर्म दूध, हल्दी, दालचीनी और गुड़ शामिल करना फायदेमंद है. ज़्यादा कैफीन से बचें. दैनिक दिनचर्या में सुबह की धूप लेना, 20 मिनट टहलना, नियमित नींद लेना, और स्क्रीन टाइम कम करना शामिल होना चाहिए. तिल, ब्राह्मी, और अंजन तेल से सिर और पैरों की मालिश करने से मन शांत होता है. दूध में अश्वगंधा पाउडर, गर्म पानी में घी की कुछ बूंदें, या शहद के साथ दालचीनी जैसे सरल घरेलू उपचार भी फायदेमंद हैं. 

डिप्रेशन का इलाज
रात में जटामांसी का काढ़ा पीना, मंत्रों का जाप करना, शांत संगीत सुनना और जर्नल लिखना मन को स्थिर करने में मदद कर सकता है. अगर आपको उदासी, एनर्जी की कमी, या खुद को नुकसान पहुंचाने के विचार आते हैं, तो तुरंत किसी विशेषज्ञ से सलाह लें. आयुर्वेद हार्मोनल असंतुलन और डिप्रेशन का जड़ से इलाज करता है, पाचन क्रिया को बेहतर बनाता है, नसों को शांत करता है और मन को मजबूत बनाता है.


BBDS Logo

Bindass Bol Dil Se

Written by: Taushif

13 Dec 2025  ·  Published: 22:24 IST

बिना सफर किए भी हो सकता है 'इंटरनल जेट लैग', डिप्रेशन का खतरा बढ़ा रहा है ये नया ट्रेंड

प्रतीकात्मक फोटो

प्रतीकात्मक फोटो

Internal Jet Lag: हम सभी ने 'जेट लैग' के बारे में सुना है, जो आमतौर पर लंबी उड़ानों के बाद होता है। जब कोई व्यक्ति एक टाइम ज़ोन से दूसरे टाइम ज़ोन में जाता है, तो उसकी बॉडी क्लॉक यानी जैविक घड़ी गड़बड़ा जाती है। इसे जेट लैग कहते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि लोगों को बिना कहीं गए, बिना उड़ान पकड़े भी जेट लैग जैसी समस्या हो सकती है? इस स्थिति को 'आंतरिक जेट लैग' कहते हैं, और इसका मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है।

ऑस्ट्रेलिया के सिडनी विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने एक नए अध्ययन में कहा है कि आंतरिक जेट लैग अवसाद, उन्माद और द्विध्रुवी विकार जैसी मानसिक बीमारियों से जुड़ा हो सकता है। इस अध्ययन में उन युवाओं का अध्ययन किया गया जो मानसिक स्वास्थ्य सेवाएँ ले रहे थे। उनमें से 23 प्रतिशत में जेट लैग जैसे लक्षण थे, जबकि उन्होंने हाल ही में कोई यात्रा नहीं की थी।

शोधकर्ताओं ने पाया कि इन युवाओं की जैविक घड़ी यानी सर्कैडियन लय सही नहीं थी। सर्कैडियन लय शरीर के तापमान, हार्मोन (जैसे मेलाटोनिन और कोर्टिसोल) और सोने-जागने के समय को नियंत्रित करती है। अगर यह लय गड़बड़ा जाती है, तो इसका असर व्यक्ति की नींद, मनोदशा और ऊर्जा के स्तर पर पड़ता है।

अध्ययन के अनुसार, रात में मेलाटोनिन का स्तर बढ़ने पर नींद आती है और सुबह इसका स्तर कम हो जाता है, जिससे व्यक्ति की नींद खुल जाती है। अगर कोई व्यक्ति देर रात तक मोबाइल या स्क्रीन पर लगा रहता है, या उसकी नींद का समय हर दिन बदलता रहता है, तो यह लय गड़बड़ा सकती है। इससे व्यक्ति को दिन भर थकान, मूड स्विंग और अवसाद जैसी समस्याएँ हो सकती हैं।

शोधकर्ताओं का मानना है कि मानसिक रोगों के इलाज में अब सर्कैडियन रिदम को ठीक करना भी ज़रूरी है। इसके लिए लाइट थेरेपी, रोज़ाना एक निश्चित समय पर सोना और मेलाटोनिन सप्लीमेंट लेना मददगार हो सकता है।

यह अध्ययन युवाओं के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि आज की अनियमित दिनचर्या और स्क्रीन टाइम ने नींद और मानसिक स्वास्थ्य दोनों को प्रभावित किया है। अगर समय रहते ध्यान दिया जाए, तो आंतरिक जेट लैग को नियंत्रित करना संभव है।


BBDS Logo

Bindass Bol Dil Se

Written by: Taushif

20 Jul 2025  ·  Published: 09:08 IST